कर्नाटक विधानसभा चुनाव मतगणना LIVE: भाजपा को मिला बहुमत, जानिए सभी 222...

कर्नाटक विधानसभा चुनाव मतगणना LIVE: भाजपा को मिला बहुमत, जानिए सभी 222 विधानसभा सीटों के रुझान

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बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनावों के परिणाम ने मोदी लहर पर एक बार फिर से मुहर लगा दी है। ताजा रुझानों के अनुसार भाजपा कर्नाटक में बहुमत के आंकडे से आगे निकल गई हैं। रुझानों में भाजपा ने कांग्रेस पर बड़ी बढ़त बना ली है। ताजा रुझानों के अनुसार भाजपा ने 114 सीटों पर बढ़त बनाई है तो कांग्रेस 64 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं जेडीएस के उम्मीदवार 43 सीटों पर जबकि एक सीट पर अन्य आगे चल रहे हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी दोनों ही सीटों, चामुंडेश्वरी और बादामी सीट पर पिछड़ गए हैं . वहीं, जेडीएस नेता एच डी कुमारस्वामी रामनगर सीट से 1,000 वोटों से आगे चल रहे हैं।


भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा शिकारीपुर सीट पर 3420 वोटों के अंतर से आगे चल रहे हैं. यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार जी बी मलतेश से है। चुनाव बाद सर्वेक्षणों में राज्य में त्रिशंकु विधानसभा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है. ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का जनता दल (एस) ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकता है। राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों पर 12 मई को मतदान हुआ था. आरआर नगर सीट पर चुनावी गड़बड़ी की शिकायत के चलते मतदान स्थगित कर दिया गया था. जयनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार के निधन के चलते मतदान टाल दिया गया था।

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राज्य में 4.98 करोड़ से अधिक मतदाता हैं जो 2600 से अधिक उम्मीदवारों के बीच से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकेंगे. इन मतदाताओं में 2.52 करोड़ से अधिक पुरुष, करीब 2.44 करोड़ महिलाएं तथा 4,552 ट्रांसजेंडर हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) संजीव कुमार के अनुसार, 1952 के बाद राज्य में 12 मई को रिकॉर्ड मतदान हुआ है. पंजीकृत 4.97 करोड़ मतदाताओं में से 72.13 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि मतदान का प्रतिशत 1952 के राज्य विधानसभा चुनाव के बाद सबसे अधिक है. चुनाव तक जब्त नकदी के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि 94 करोड़ रुपये नकद, 24.78 करोड़ रुपये कीमत की शराब के साथ ही 66 करोड़ रुपये मूल्य के कपड़े, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किये गए हैं।


यदि कांग्रेस के पक्ष में स्पष्ट जनादेश जाता है तो 1985 के बाद यह पहली बार होगा जब कोई दल लगातार दूसरी बार सरकार बनाएगा. 1985 में तत्कालीन जनता दल ने रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। यह हालांकि अभी अस्पष्ट है कि कांग्रेस के जीतने की स्थिति में पिछड़ा वर्ग से आने वाले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री होंगे या नहीं. कांग्रेस ने हालांकि कहा था कि चुनाव में सिद्धारमैया ही उसका चेहरा होंगे, लेकिन उसने यह घोषणा नहीं की कि पार्टी की जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री भी वही होंगे। सिद्धारमैया ने मतदान के बाद कहा था कि यदि आलाकमान फैसला करता है तो वह किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमत होंगे. राजनीतिक हल्कों में उनके इस बयान को खंडित जनादेश की स्थिति में जनता दल (एस) से गठबंधन करने की ओर इशारा करने के रूप में माना गया।


देवगौड़ा की पार्टी से सिद्धरमैया के संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि पूर्व में वह जनता दल (एस) के ही नेता थे. सिद्धारमैया ने पूर्व में संवाददाताओं से कहा था, ‘मुझे यकीन है कि कांग्रेस बहुमत के साथ चुनाव जीतेगी और मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।’ उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि आलाकमान अगले मुख्यमंत्री के बारे में फैसला करने से पहले जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों से भी सलाह-मशविरा करेगा. कांग्रेस ने क्योंकि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी, इसलिए लोकसभा सांसद मल्लिककार्जुन खड़गे और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जी परमेश्वर जैसे दलित नेताओं को संभावित विकल्पों के रूप में देखा जा रहा है।


पार्टी के गिरते मनोबल को कर्नाटक में जीत से मजबूती मिलेगी जो केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद एक के बाद एक राज्य हारती जा रही है. कर्नाटक में हार से अगले लोकसभा चुनाव के लिए संभावित भाजपा विरोधी मोर्चे का नेतृत्व करने का उसका दावा कमजोर हो जाएगा। वहीं, अगर राज्य में भाजपा जीतती है तो एक बार फिर इसे मोदी के करिश्मे के रूप में लिया जाएगा तथा भाजपा शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। जनता दल (एस) ने भी अपनी जीत का दावा किया है और कहा है कि मुख्यमंत्री पद के इसके उम्मीदवार एचडी कुमारस्वामी ‘किंग’ होंगे, न कि ‘किंगमेकर’।


त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में एक संभावना यह हो सकती है कि 2004 की तरह ही कांग्रेस और जनता दल (एस) के बीच गठबंधन हो जाए जब कांग्रेस के दिग्गज धर्म सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी थी. यदि इन दोनों के बीच गठबंधन होता है तो जनता दल (एस) मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के नाम पर सहमत नहीं होगा और वह किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर सकता है। हाल ही में संपन्न हुआ कर्नाटक विधानसभा चुनाव राजनीतिक पार्टियों और उनके द्वारा खर्च किए गए धन के मामले में देश में आयोजित ‘अब तक का सबसे महंगा’ विधानसभा चुनाव रहा. यह सर्वेक्षण सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज ने किया है. यह सेंटर खुद को अपनी वेबसाइट पर एक गैर सरकारी संगठन और थिंक टैंक बताता है. इसके द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कर्नाटक चुनाव को ‘धन पीने वाला’ बताया है।


सीएमएस के अनुसार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और उनके उम्मीदवारों द्वारा कर्नाटक चुनाव में 9,500-10,500 करोड़ रुपये के बीच धन खर्च किया गया. यह खर्चा राज्य में आयोजित पिछले विधानसभा चुनाव के खर्च से दोगुना है। सर्वेक्षण में बताया गया कि इसमें प्रधानमंत्री के अभियान में हुआ खर्चा शामिल नहीं है. पिछले 20 वर्षों के सीएमएस द्वारा किए गए जमीनी सर्वेक्षण यह संकेत देते हैं कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हुआ खर्चा आम तौर पर देश के दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव में हुए खर्चे से ज्यादा है। सर्वेक्षण में बताया गया है कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु देश में विधानसभा चुनाव में खर्चे के मामले में सबसे आगे हैं. सीएमएस के एन भास्कर राव ने कहा कि खर्च की दर अगर यही रही तो 2019 के लोकसभा चुनाव में 50,000-60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. पिछले लोकसभा चुनाव में 30,000 करोड़ रूपया खर्च हुआ था।

सर्वेक्षण में पाया गया कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जो कुल चुनावी खर्च हुआ हैं, उसमें व्यक्तिगत उम्मीदवारों का खर्चा 75 फीसदी तक बढ़ गया है. संगठन ने एक बयान में कहा कि ऐसे में लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार का खर्चा 55-60 फीसदी बढ़ने की संभावना है जबकि राजनीतिक पार्टियों का खर्चा 29-30 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है, जो कि 12,000-20,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।

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