कर्नाटक में BJP की किलेबंदी के पीछे है मायावती का दिमाग!, पूरी...

कर्नाटक में BJP की किलेबंदी के पीछे है मायावती का दिमाग!, पूरी रणनीति जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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लखनऊ। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और किसी राजनीतिक पार्टी को बहुमत न मिलने पर अकेले दम पर सरकार बनाना मुश्किल है।हालांकि बीजेपी के येदियुरप्पा के बाद जेडीएस के कुमारस्वामी ने भी राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। अब गेंद राज्यपाल के पाले में है।इस बीच खबर है कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने किंगमेकर की भूमिका निभाते हुए और बीजेपी को राज्य में रोकने के लिए खुद यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को कॉल किया था। बताया जा रहा है कि माया ने ही सोनिया और जेडीएस के मुखिया एचडी देवगौड़ा से बात करके उन्हें एक साथ आने और सरकार बनाने के लिए का सुझाव दिया था।


बता दें कि बीएसपी ने चुनाव पूर्व कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन किया था और 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। मायावती ने खुद चुनाव प्रचार के दौरान जेडीएस नेताओं के साथ मिलकर रैली भी संबोधित की थी। यद्यपि बीएसपी का वोट शेयर 2013 के चुनाव के मुकाबले 1.16 फीसदी से घटकर इस बार 0.3 फीसदी रहा हो लेकिन फिर भी वह राज्य में पहली बार एक सीट जीतने में कामयाब रही।

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बीएसपी के अांतरिक सूत्र बताते हैं कि मायावती ने अपने करीबी सहयोगी और पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेता गुलाब नबी आजाद से मिलने को कहा था। वह कर्नाटक बीएसपी के इनचार्ज भी हैं। जब आजाद ने सोनिया से बात कर संभावित गठबंधन के बारे में बात की तब मायावती ने जेडीएस मुखिया देवगौड़ा को कॉल किया और उन्हें गठबंधन के लिए मनाया। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद उन्होंने सोनिया से भी बात की और जेडीएस को बाहर से समर्थन देने का सुझाव दिया जिस पर वह मान गईं।


कर्नाटक में एक वरिष्ठ बीएसपी नेता ने बताया, ‘हम बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस के खिलाफ भी प्रचार किया लेकिन हमें सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है। मायावती ने इससे पहले भी 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस को समर्थन दिया था और जब कांग्रेस के नौ विधायक बीजेपी कैंप में शामिल हो गए थे, तब उनके दो विधायकों ने कांग्रेस के लिए फ्लोर टेस्ट में वोट किया था।


राजनीति की यही खासियत है। कब दोस्त दुश्मन हो जाए, और कब दुश्मन दोस्त, यह बिल्कुल अप्रत्याशित है, ठीक चुनाव के नतीजों की तरह। कल तक एक-दूसरे के खिलाफ जुबानी जंग छेड़ने वाले कांग्रेस नेता सिद्धारमैया और जेडीएस मुखिया एचडी देवगौड़ा ने आज हाथ थाम लिया है। यही नहीं जेडीएस के लिए सिद्धारमैया ने सीएम की गद्दी भी त्याग दी। मंगलवार कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह साफ हो गया कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती। ऐसे में कांग्रेस ने जेडीएस को बाहर से समर्थन देने का फैसला किया। साथ ही जेडीएस को ही सीएम तय करने का ऑफर दिया।


जेडीएस और कांग्रेस दोनों विचारधाराओं में अलग-अलग हैं लेकिन राजनीति में सब मुमकिन है। सिद्धारमैया खुद कभी जेडीएस के ही नेता हुआ करते थे। सिद्धारमैया और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का एक लंबा इतिहास है। सिद्धारमैया कभी जनता दल के प्रतिनिधि हुआ करते थे। फिर 1999 में जनता दल के बंटवारे के बाद वह जनता दल (सेक्युलर) में शामिल हुए। 2004 में कर्नाटक में हंग असेंबली बनी। जेडीएस और कांग्रेस ने गठबंधन किया। कांग्रेस के धरम सिंह सीएम बने और सिद्धारमैया डिप्टी सीएम। सिद्धारमैया जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा से खुश नहीं थे क्योंकि उन्होंने उन्हें सीएम बनाने का वादा किया था। इसके बाद से ही सिद्धारमैया और देवगौड़ा के बीच कोल्ड वार छिड़ गया। इसके बाद 2005 में एचडी देवगौड़ा ने अपने बेटे कुमारस्वामी को अपना उत्तराधिकारी चुना जिसे नाखुश होकर सिद्धारमैया ने जेडीएस छोड़ दी।

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